पूर्णिया, मार्च 15 -- बैसा, एक संवाददाता। रमजान का महीना इस्लाम धर्म में बेहद पवित्र और बरकत वाला माना जाता है। इस महीने में रोजेदार भूखे-प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत करते हैं और आत्मसंयम, दया तथा सहानुभूति की भावना को अपनाते हैं। प्रखंड प्रमुख शमीम अख्तर उर्फ लालबाबू और उपप्रमुख फिरोज आलम ने इफ्तार के दौरान कहा कि रमजान रहमत, मगफिरत और बरकत का महीना है। रोजा रखने से इंसान के अंदर विनम्रता और कोमलता का भाव विकसित होता है। भूख और प्यास की स्थिति में रोजेदार को गरीब और जरूरतमंद लोगों की पीड़ा का एहसास होता है, जिससे उसके मन में उनके प्रति हमदर्दी और मदद की भावना पैदा होती है। उन्होंने बताया कि रमजान के पहले दस दिन रहमत के, अगले दस दिन मगफिरत यानी गुनाहों की माफी के और अंतिम दस दिन जहन्नम की आग से निजात पाने के लिए माने जाते हैं। इस दौरान मुस...