रायबरेली, फरवरी 25 -- सुलतानपुर। रमजान का मुकद्दस महीना नेकियों का मौसम-ए-बहार और गुनाहों से निजात दिलाने वाला महीना माना जाता है। साल के अन्य ग्यारह महीनों की अपेक्षा रमजान की फज़ीलत और अहमियत कहीं अधिक है। यह महीना केवल रोज़ा और इबादत का ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश देता है। हाजी मसरूर उद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि इस्लाम में अपनी आमदनी का कम से कम 2.5 प्रतिशत हिस्सा ज़कात के रूप में जरूरतमंदों को देना अनिवार्य किया गया है। ज़कात, फ़ितरा, सदका और इमदाद के माध्यम से समाज के कमजोर तबके को सहारा देना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, उनके बच्चों की शिक्षा, वस्त्र और दवाइयों की व्यवस्था करना रमजान की असल रूह है। विशेषकर अपने कर्मचारियों, सहायक कर्मियों और जरूरतमंदों के साथ नरमी, रहमदिली और सद्व्यवहार करना इस पवित्...