मुरादाबाद, फरवरी 25 -- मस्जिद रफीकुल उलूम में बुधवार को रमजान के बारे में बयान करते हुए मदरसा रफीकुल उलूम के प्रधानाचार्य व तहसील इमाम कारी अब्दुल मुईद ने कहा कि रोजेदार एक हफ्ते का सफर पूरा कर चुके हैं। सातवां रोजा इसलिए खास माना जाता है क्योंकि यह इंसान को याद दिलाता है कि वह सिर्फ भूखा-प्यासा नहीं रह रहा, बल्कि धीरे-धीरे खुद को बदलने की प्रक्रिया में है। कारी अब्दुल मुईद ने कहा कि रमजान का हर दिन अहम है लेकिन सातवें रोजे तक पहुंचते-पहुंचते रोजेदार का शरीर और मन दोनों इस इबादत के अनुशासन में ढलने लगते हैं। यह वह समय होता है जब इंसान अपने अंदर झांककर देखता है कि उसने कितनी बुराइयों से दूरी बनाई और इतनी नेकियों को अपनाया। रमजान का महीना इस्लाम में सबसे पवित्र और बाबरकत महीना है, जिसमें जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, जहन्नुम के दरवाजे ब...