उरई, मार्च 17 -- उरई। काजी-ए-शहर शकील बेग रहमानी ने रमज़ान के मौके पर मुसलमानों को सदक़ा-ए-फितर की अहमियत बताते हुए कहा कि हर साहिबे-निसाब मुसलमान पर फितरा देना जरूरी है। उन्होंने बताया इस वर्ष स्थानीय बाजार की कीमतों को देखते हुए फितरा 65 रुपये प्रति व्यक्ति तय किया गया है। काजी-ए- शहर शकील बेग रहमानी ने बताया कि सदक़ा-ए-फितर हर उस आज़ाद मुसलमान पर वाजिब है, जिसके पास अपनी बुनियादी जरूरतों और कर्ज़ के अलावा इतना माल या सामान हो जिसकी कीमत करीब साढ़े बावन तोला चांदी के बराबर या उससे अधिक हो। इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि उस माल पर एक साल गुजर चुका हो। उन्होंने कहा कि आमतौर पर घर का मुखिया अपनी तरफ से, पत्नी और नाबालिग बच्चों की तरफ से फितरा अदा करता है। यदि बड़े बच्चे साहिबे-निसाब हों तो उनका फितरा वे स्वयं या उनकी अनुमति से दिया जा सकता ह...