बलिया, मार्च 11 -- बलिया, संवाददाता। रमजान के पाक महीने का तीसरा अशरा बुधवार से शुरू हो गया। वैसे तो रमजान का पूरा महीना अन्य महीनों से खास और महत्वपूर्ण है, लेकिन रमजान शरीफ के आखिरी दस दिनों के और भी ज्यादा सवाब बताए गए हैं। मुफ्ती नसीम जफर कासमी ने बताया कि हदीश शरीफ में अल्लाहतआला इस अशरे में अपने बंदों को जहन्नम से आजादी देते हैं। इसी तरह इन दस दिनों एहतेकाफ किया जाता है। एहतेकाफ के मायने मस्जिद में इबादत की नीयत से ठहरने के हैं। एहतेकाफ करना सुन्नत अलल कियाफा है। पूरे मोहल्ले वालों की जिम्मेदारी है कि उनका कोई फर्द यानी कोई एक आदमी मस्जिद में इन दिनों एहतेकाफ में बैठें। यदि मोहल्ले का कोई भी व्यक्ति मस्जिद में एहतेकाफ न करें तो पूरे मोहल्ले वाले गुनाहगार होंगे। मुफ्ती कासमी ने बताया कि हदीश में कहा गया है कि हजरत मोहम्मद साहब रमजान ...