मऊ, मार्च 15 -- मऊ,संवाददाता। माह-ए-रमजान का आखिरी अशरा जहां इबादत एवं तौबा के लिए सबसे अहम माना जाता है। वहीं महिलाओं के लिए यह समय जिम्मेदारियों और इबादत के बीच संतुलन बनाने की बड़ी परीक्षा भी बन जाता है। महिलाओं के लिए रमजान एक चुनौती बन जाता है। तमाम जिम्मेदारियों को निभाते हुए अल्लाह की इबादत करना चुनौतीपूर्ण कार्य है। माह-ए-रमजान में महिलाओं को तिहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। महिलाओं को घरेलू कार्यों के साथ बच्चों की देखभाल, सहरी की तैयारी एवं इफ्तार के समय तरह-तरह के पकवान बनाकर दस्तरखान सजाने की जिम्मेदारी अधिकतर महिलाओं के कंधों पर होती है। इसके बावजूद वे नमाज, तिलावत-ए-कुरआन, दुआ और तौबा में भी पूरा समय देने की कोशिश करती हैं। रमजान के आखिरी अशरे में शब-ए-कद्र की तलाश को लेकर भी महिलाएं खास एहतमाम करती हैं। कई महिलाएं रात में ...