अररिया, मार्च 11 -- फारबिसगंज, एक संवाददाता। रमज़ान का महीना बहुत ही मुबारक, रहमतों और बरकतों वाला महीना है। अल्लाह तआला ने इस महीने को बाकी महीनों पर खास फजीलत दी है। यह महीना इबादत,सब्र,तक्वा और गुनाहों से तौबा का महीना है। रमज़ान का आखिरी अशरा (21वें रोज़े से 30 वां रोज़ा) मगफिरत और जहन्नम से निजात (आज़ादी) का दौर है। उक्त बातें स्थानीय खुश्बू नगर स्थित जामे मस्जिद के इमाम हाफ़ज़ि उमर फारूक रहमानी ने कही। उन्होंने कहा कि इस मुबारक दौर में लैलतुल कद्र जैसी अज़ीम रात और एतकाफ़ जैसी इबादतें होती हैं। नबी करीम (स.) इस दौरान सबसे ज़्यादा इबादत करते थे, रातों को जागकर दुआएं मांगते और परिवार को भी इबादत के लिए प्रेरित करते थे। कहा कि हदीस में है कि रमज़ान का पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा अशरा दोज़ख (जहन्नम) की आग से छुटकारा दिलाने वाल...
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