नई दिल्ली, जनवरी 20 -- रथ सप्तमी से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। यह कथा कहती है, जब सूर्य देव को खड़े-खड़े काफी लंबा समय बीत गया, तो उनके पांव दुखने लगे। उन्होंने भगवान विष्णु के सामने अपनी समस्या रखी। श्रीहरि ने सूर्य देव की समस्या को दूर करने के लिए उन्हें हीरे जड़ित एक स्वर्ण रथ दिया। इस रथ के सारथि अरुण देव थे। जिस दिन यह रथ सूर्य को मिला, उस दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि थी। इस दिन इस रथ पर सूर्य के विराजमान होने के कारण इसे 'रथ सप्तमी' कहा गया। सूर्य के रथ में सात घोड़े होने के कारण भी इसे 'रथ सप्तमी' कहा जाता है। सूर्य के रथ में- 'गायत्री', 'भ्राति', 'उष्निक', 'जगती', 'त्रिस्तप', 'अनुस्तप' और 'पंक्ति' नाम के सात घोड़े हैं। ये सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों, सात किरणों के प्रतीक हैं। सूर्य के रथ का पहिया संवत्सर वर्ष और उसमें लगी बार...