नई दिल्ली, फरवरी 23 -- भारत 76 रन से दक्षिण अफ्रीका से मैच हार गया। जिन लोगों ने मैच देखा होगा, वे इस बात पर सहमत होंगे कि भारत की कोई रणनीति न थी। टीम इंडिया यह सोचकर मैदान में उतरी थी कि ओपनर में से एक तो शतक लगाएगा ही। वरुण पर अंधविश्वास था। बाद में दक्षिण अफ्रीका ने जब कुटाई शुरू की, तो गंभीर की टीम की रणनीति की पोल खुल गई। अक्षर क्यों बदले गए, बताइए? कोई टिकने वाला खिलाड़ी नहीं। यशस्वी, अय्यर या के एल राहुल में से किसी एक को न रखने की जिद। शमी को धकेलकर फील्ड से बाहर करने का अहं- यह कितना महंगा पड़ा! सबसे बड़ी बात यह कि टीम कॉम्बिनेशन कितना पहले तय हुआ? हर्षित अब तक न दिखे। जब आप विश्व टूर्नामेंट में जा रहे थे, उस टीम को कम से कम छह माह साथ खेलना चाहिए था। गावस्कर, गांगुली से धौनी तक की बात मानना तो दूर, गंभीर उनको बेइज्जत करते रहे। ...