सीवान, सितम्बर 6 -- रघुनाथपुर, एक संवाददाता। गुरू कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि गढ़ि काढै खोट, अंतर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट। कबीरदास के इस प्रसिद्ध दोहे के माध्यम से गुरु-शिष्य संबंध की गहराई को रघुनाथपुर में शिक्षक दिवस के अवसर पर भलीभांति महसूस किया गया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में अपने योगदान की महत्ता को रेखांकित किया। यह भी पढ़ें- Nawada News: जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया शिक्षक दिवसशिक्षकों का योगदान गुरु, शिष्य को उस माटी की तरह गढ़ते हैं, जैसे कुम्हार घड़े को आकार देता है- बाहरी कठोरता के साथ भीतरी कोमलता से। शिक्षक भी शिष्य के दोषों पर चोट करते हैं, लेकिन भीतर से उन्हें टूटने से बचाते हैं, उन्हें संबल देते हैं। ऐसे ही महान शिक्षकों की परंपरा में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का नाम सम्मान ...