रांची, जून 19 -- रांची, वरीय संवाददाता। एक समय था जब रक्तदान को महादान मानकर बड़ी संख्या में लोग रक्तदान शिविरों में पहुंचते थे। कॉलेजों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और कॉरपोरेट कंपनियों की पहल से राजधानी रांची में हर महीने दर्जनों रक्तदान शिविर आयोजित होते थे। लेकिन अब यह आंदोलन धीरे-धीरे कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। रक्त की बढ़ती मांग के मुकाबले स्वैच्छिक रक्तदाताओं की संख्या में कमी आने लगी है। इसका सीधा असर शहर के ब्लड बैंकों पर दिखाई दे रहा है। रिम्स, सदर अस्पताल और निजी ब्लड बैंकों को प्रतिदिन बड़ी मात्रा में रक्त की जरूरत होती है। लेकिन रक्तदान शिविरों में पहले जैसी भागीदारी नहीं दिख रही। कई सामाजिक संगठन स्वीकार करते हैं कि युवाओं की रुचि घटने और नियमित जागरुकता अभियानों की कमी के कारण रक्तदान आंदोलन की गति धीमी हुई है। गर्मी क...