गिरडीह, मार्च 24 -- झारखंडधाम। जमुआ प्रखंड के रंगामाटी गांव में वासंतिक नवरात्र पूजा की परंपरा वर्ष 1933 से निरंतर जारी है। ब्रिटिश काल में स्थापित यह दुर्गा मंदिर आज भी क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर की स्थापना तत्कालीन जमींदार लाला टुनटुन प्रसाद ने कराई थी। जमींदारी उन्मूलन के बाद पूजा का दायित्व स्थानीय ग्रामीणों ने संभाल लिया और तब से यह आयोजन सामूहिक सहयोग से संचालित हो रहा है। मंदिर के नाम पर करीब ग्यारह एकड़ साठ डिसमिल जमीन दर्ज है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है। नवरात्र की शुरुआत कलश स्थापना के साथ होती है और उसी समय पारंपरिक रूप से बकरे की बलि दी जाती है। प्रतिमा विसर्जन तक कुल सात बकरों की बलि दी जाती है, जो वर्षों पुरानी मान्यता का हिस्सा है। वजीर भक्त पहले पुजारी थे। वर्तमान में गांव के लगभग 175 पर...