मधुबनी, जून 7 -- शैलेन्द्र कुमार मधुबनी। मधुबनी रंग महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि मिथिला में रंगमंच की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। वर्षों से उपेक्षा और बदलते दौर के कारण हाशिये पर पहुंच चुकी नाट्य परंपरा को इस महोत्सव ने एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है। वरिष्ठ रंगकर्मियों का मानना है कि इस आयोजन ने मिथिला क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है और इसका दूरगामी प्रभाव आने वाले वर्षों में देखने को मिलेगा। कभी गांव-गांव में दुर्गापूजा, सरस्वती पूजा, जन्माष्टमी, छठ और अन्य सामाजिक आयोजनों में नाटक लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करता था। नाटक मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और जनजागरण का भी सशक्त माध्यम था। समय के साथ यह परंपरा कमजोर पड़ती गई, लेकिन मधुबनी रंग महोत्सव ने एक बार फिर यह विश्...