नई दिल्ली, जून 30 -- यहां की एक विशेष अदालत ने 30 साल के एक व्यक्ति को 2022 में एक नाबालिग लड़की का बार-बार यौन उत्पीड़न करने के लिए 20 साल की कठोर कैद सुनाई। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत बच्ची की सहमति मायने नहीं रखती और बचाव पक्ष की 'प्रेम संबंध' वाली दलील खारिज कर दी। स्पेशल पॉक्सो अदालत की जज प्रेमल विठलानी ने सोमवार को धनेश्वर उर्फ ​​धुलेश्वर पूजियालाल कालसुवा को आईपीसी और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, कोर्ट ने कालसुवा को अपहरण के आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता अपनी मर्जी से उसके साथ राजस्थान में उसके पैतृक गांव गई थी ताकि शादी कर सके और अपने परिवार से बच सके। जज ने कालसुवा पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो मुआवजे के तौर पर पीड़िता को दिया जाएगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट...