नई दिल्ली, जुलाई 16 -- राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि यौन अपराधों की व्याख्या करते समय अदालतों को केवल शारीरिक कृत्य को आधार नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़िता की गरिमा, उसकी सहमति और घटना से उसके मन में पैदा हुए भय को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि न्यायिक प्रक्रिया पीड़िता के वास्तविक अनुभवों और कानून की मूल भावना को नजरअंदाज कर केवल कानूनी तकनीकी पहलुओं तक सीमित रह जाए, तो न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ना स्वाभाविक है।रहाटकर ने कहा कि निस्संदेह अदालतें कानून और उनके समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देती हैं। यह भी पढ़ें- सलवार उतारना और स्तन दबाना रेप नहीं, HC की इस बात पर बवाल; अब महिला आयोग ने क्या कहा? लेकिन यदि 18 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया क...