रांची, जून 14 -- रांची। योगदा सत्संग आश्रम में आयोजित रविवारीय सत्संग को संबोधित करते हुए आश्रम के वरीय संन्यासी स्वामी ईश्वरानन्द गिरि ने कहा कि योग स्वयं की सीमित मानवीय चेतना को ईश्वर की अनंत चेतना से मिलाने का नाम है। उन्होंने कहा कि जिसने योग साधना को सिद्ध कर लिया, समझो उसने अपने जीवन के मूल लक्ष्य को प्राप्त कर लिया। योग कोई सामयिक क्रिया नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली एक प्रक्रिया और संपूर्ण जीवन शैली है, जिसका निष्ठापूर्वक पालन करने से मनुष्य का शरीर, मन और आत्मा तीनों तृप्त होते हैं। स्वामी जी ने आध्यात्मिक गूढ़ता को समझाते हुए कहा कि प्रत्येक जीवात्मा के अस्तित्व के तीन मुख्य पहलू होते हैं-पहला स्थूल शरीर, दूसरा मन और तीसरा आत्मा। यह भी पढ़ें- ध्यान मन, बुद्धि और चेतना के संतुलन का विज्ञान ये तीनों ही पहलू ध्यान (मेडिटेशन) से गहर...