लखनऊ, नवम्बर 7 -- उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्यप्रणाली और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि प्रदेश में नागरिक स्वतंत्रता की स्थिति बेहद शर्मनाक है। ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस को नागरिकों के मौलिक अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता की कोई खास परवाह नहीं है। इन अधिकारों का उल्लंघन पुलिस के लिए अब सामान्य बात बनता जा रहा है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने यह टिप्पणी अवैध हिरासत से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अवैध हिरासत के आरोप वाले मामलों में पुलिस सीसीटीवी कैमरे खराब होने का बहाना नहीं बना सकती। हाईकोर्ट ने अफजल अहमद की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया। साथ ही राज्य सरकार को सात दिनों के...