नई दिल्ली, अप्रैल 14 -- उत्तर प्रदेश के किसानों और आम जनता के लिए मौसम विभाग ने एक चिंताजनक पूर्वानुमान जारी किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सोमवार शाम जारी दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक समुद्री परिस्थितियों और वायुमंडलीय बदलावों के कारण मानसूनी हवाएं इस बार अपनी पूरी ताकत नहीं दिखा पाएंगी, जिससे खेती-किसानी पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने इस शुष्क मानसून के पीछे तीन प्रमुख प्राकृतिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है।मानसून कमजोर रहने के तीन बड़े भौगोलिक कारण पहला 'अल नीनो' का खतरा: इस साल मानसून की बेरुखी का सबसे बड़ा कारण भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में 'अल नीनो' (El Niño) का सक...