नई दिल्ली, जनवरी 22 -- सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं समाज विरोधी गतिविधि रोकथाम अधिनियम 1986 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई शुरू की। याचिकाकर्ताओं ने न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ को बताया कि 1986 का कानून मनमाना और केंद्रीय कानून के विपरीत था। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी ने कहा कि बीएनएस 2023 की धारा 111 में पहले से ही गैंगस्टरों और संगठित अपराध से संबंधित प्रावधान हैं और ऐसे ही प्रावधान उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 1986 के अधिनियम से जुड़े नियमों में संशोधन किया है और कुख्यात अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान अब बीएनएस में भी शा...