प्रयागराज, अक्टूबर 8 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन (एमएलसी चुनाव) क्षेत्रों की मतदाता सूची और चुनाव कार्यक्रम को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संशोधन की प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23 के तहत की गई थी। इसमें नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाने के कारण संविधान का अनुच्छेद 329 भी चुनौती के आड़े आता है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने यह आदेश अखिलेश उपाध्याय की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में 29 सितंबर 2026 की उस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसके आधार पर विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव कराया जाना है।...