गढ़वा, जनवरी 23 -- गढ़वा, प्रतिनिधि। युवा समाजसेवी अभिषेक पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) की ओर से हाल ही में उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम जारी किए गए हैं। उसके तहत सभी संस्थानों को अपने यहां एक सामानता समिति बनानी होगी। ऐसा न करने पर संस्थान को डिग्री देने व अन्य कार्यक्रम रोके जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून के अनुसार धर्म, लिंग, या विकलांगता के आधार पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भेदभाव को रोकना है परंतु केवल इसके शिकार सवर्ण ही क्यों होंगे। यह नियम केवल विशेष समुदाय के लिए लाना शायद बिल्कुल उचित नहीं है। यह कानून देश को तोड़ने वाला कानून साबित होने वाला है। उसमें अनूसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग व दिव्यांग और महिलाओं को शामिल किया गया है। उनकी शिकायतें सुनने औ...