नवादा, मार्च 10 -- ​नवादा। राजेश मंझवेकर सुबह के छह बजते ही नवादा शहर की सड़कों पर साइकिलों और पैदल चलते युवाओं का रेला उमड़ पड़ता है। प्रजातंत्र चौक से लेकर गोवर्धन मंदिर रोड तक की गलियां कोचिंग संस्थानों के बैनरों से पटी पड़ी हैं। जिले में हजारों युवा हर साल स्नातक और परास्नातक की डिग्रियां हासिल कर रहे हैं, लेकिन जब बात रोजगार की आती है, तो उनके हाथ खाली रह जाते हैं। नवादा का युवा स्कूली डिग्री के साथ जब रोजगार की तलाश में जुटता है, तब उसे जरूरतों के अनुसार कौशल का सहारा नहीं मिल पा रहा। कहने को तो जिले में सरकारी कौशल विकास केन्द्र हैं, लेकिन सिर्फ कम्प्यूटर शिक्षा तक ही सीमित ऐसे केन्द्र सम्पूर्ण कुशल युवा नहीं बना पाने के कारण अब तक बहुत कारगर साबित होते नहीं दिख रहे हैं। बेरोजगारी का दंश झेल रहे युवा खालीपन में आज डिजिटल दीवानगी के एक ...