भागलपुर, मार्च 28 -- भागलुर, वरीय संवाददाता। बुढ़ापे में होने वाली मोतियाबिंद की बीमारी अब तेजी से युवाओं को अपना शिकार बना रही है। जवां उम्र में ही न केवल युवाओं की आंखें मोतियाबिंद की मार से बूढ़ी हो रही हैं, बल्कि उनकी नजरें भी धुंधली पड़ने लगी हैं। बीते छह सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो युवाओं में मोतियाबिंद होने की रफ्तार दोगुने से भी तेज हो गई है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस खतरनाक ट्रेंड के पीछे मुख्य कारण बढ़ता प्रदूषण और बिगड़ती जीवनशैली है। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जेएलएनएमसीएच) के नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. पम्मी राय ने बताया कि इस सीजन (दिसंबर 2025 से 20 मार्च 2026 तक) में मोतियाबिंद के कुल 329 मरीजों का ऑपरेशन किया गया। जबकि, 2019-2020 के इसी सीजन (दिसंबर 2019 से 20 मार्च 2020) में मात्र 153 मरीजों की सर्जर...