नई दिल्ली, फरवरी 2 -- भारत के लिए रणनीतिक स्तर से बेहद अहम माने जाने वाले ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश से सरकार ने इस बार हाथ पीछे खींच लिए हैं। भारत सरकार कई सालों से चाबहार के लिए कम से कम 100 करोड़ का बजट आवंटित करती थी। हालांकि आम बजट 2026-27 में एक पैसा भी चाबहार के लिए आवंटित नहीं किया गया है। जानकारों का कहना है कि इस साल के बजट में निवेश का आवंटन ना करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत चाबहार से मैदान छोड़ने जा रहा है बल्कि यह भी एक सोची-समझी रणनीति है जो कि वैश्विक स्तर पर संतुलन बनाने के लिए प्रयोग में लाई जा रही है।चीन को मिलेगा फायदा? भारत सरकार के इस फैसले को अलग-अलग ऐंगल से विश्लेषित किया जा रहा है। कई जानकारों का कहना है कि चाबहार सेअगर भारत की पकड़ ढीली होती है तो चीन इसपर हावी होने की कोशिश करेगा। वह पाकिस्तान के ग...
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