नई दिल्ली, अप्रैल 19 -- सुंबुल रिजवी,पूर्व वरिष्ठ अधिकारी, संयुक्त राष्ट्र ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से छिड़ी जंग एक 'भू-राजनीतिक घटना' मात्र नहीं है, यह एक गंभीर मानवीय संकट भी है, जो काफी गहरे लैंगिक (जेंडर) प्रभावों को समेटे हुए है। किसी भी युद्ध में हुए नुकसान का आकलन अमूमन हताहतों की तादाद और तबाह हुए बुनियादी ढांचों से किया जाता है, मगर इसका सबसे गहरा और लंबे समय तक कायम रहने वाला असर औरतों व लड़कियों की जिंदगी पर पड़ता है। इस जंग की वजह से करीब 32 लाख ईरानी बेघर हो गए हैं। इनमें से ज्यादातर औरतें और बच्चे हैं। इनके अलावा, करीब 16.5 लाख उन अफगानी शरणार्थियों पर भी इस जंग का बुरा असर पड़ा है, जो अपने मुल्क से भागकर वहां शरण लिए हुए थे। बिगड़े हालात में अब उन्हें अफगानिस्तान लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। उसी अफगानिस्तान में, जह...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.