मेरठ, जून 19 -- मोर्हरम की दूसरी तारीख गुरुवार को शहर में जुलूसों का सिलसिला शुरू हो गया। या हुसैन या अब्बास की सदाएं गूंजी। मजलिसों में उलेमाओं ने कहा कि जालिम हुकमरां यज़ीद की बैअत (आधीनता) स्वीकार न करके हजरत इमाम हुसैन और शौहदाये कर्बला ने दीन ए-इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए अपनी कुर्बानियां पेश की। दुनिया को यह पैगाम दिया कि सच्चाई, हक एवं इंसाफ के लिए जालिम ताकतों के सामने कभी नहीं झुकना चाहिए। नियाज हुसैन जैदी गुड्डू के प्रबंधन में जुलजनाह एवं अलम-ए-मुबारक का जुलूस इमामबारगाह जाहिदयान से बरामद हुआ। इससे पूर्व मौलाना सज्जाद मेहदी ने मजलिस में हजरत अब्बास की शहादत और जुलजनाह की अहमियत बयां की। यह भी पढ़ें- जुलजनाह और अलम का निकाला गया जुलूस जुलूस में अंजुमन इमामिया के वाजिद अली गप्पू, चांद मियां, रविश, मीसम तथा अंजुमन दस्तये हुसै...