नई दिल्ली, सितम्बर 18 -- प्रभात कुमार सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महज महिला होने के आधार पर एक महिला को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल) में नौकरी नहीं दिए जाने को 'नारीत्व का अपमान' बताया है। लैंगिक आधार पर योग्य होने के बाद भी एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में रीफिलिंग हेल्पर की नौकरी नहीं देने पर इंडियन आयल कार्पोरेशन आड़े हाथ लेते हुए कहा कि सोच बदलने की जरूरत है। जस्टिस अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने लैंगिक भेदभाव के चलते योग्य होने के बाद भी नौकरी से वंचित रखने पर इंडियन आयल को याचिकाकर्ता महिला (सुमित्रा) को 12 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। चूंकि महिला सेवानिवृत्ति की उम्र तक पहुंच चुकी है, इसलिए यह अदालत उसके साथ हुए भेदभाव के लिए मुआवजा देना बेहतर उचित समझती है। सुनवाई के दौरान जस्ट...