नई दिल्ली, फरवरी 6 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि सहमति से शादी करने वाले वयस्कों को एक-दूसरे से शादी करने का संवैधानिक अधिकार है। न तो समाज, न ही सरकारी मशीनरी और न ही उनके माता-पिता उनके इस फैसले में दखल दे सकते हैं। हाई कोर्ट ने यह आदेश एक कपल की याचिका पर दिया। याचिका में कपल ने महिला के पिता से सुरक्षा मांगी थी जो उनकी शादी से सहमत नहीं थे। कपल को पुलिस सुरक्षा का आदेश देते हुए जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि शादी का अधिकार इंसान की आजादी और पसंद का हिस्सा है। यह संविधान के आर्टिकल 21 और मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का एक जरूरी पहलू है। कोर्ट ने 2 फरवरी को दिए गए आदेश में कहा कि क्योंकि याचिकाकर्ता बालिग हैं और एक-दूसरे से शादी करने का उन्हें पूरा हक है। उन्होंने अपनी मर्जी से शादी के पवित्र बंधन में बंधकर जिंदगी भर एक-दूसरे का साथ ...
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