लखनऊ, अप्रैल 10 -- UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए, स्पष्ट किया है कि दहेज़ के रूप में कीमती वस्तुओं या संपत्ति की सिर्फ मांग से दहेज़ हत्या का अपराध घटित हुआ नहीं माना जा सकता, जब तक की मृतक महिला पर उत्पीड़न या क्रूरता से जुड़ी घटनाओं की स्पष्ट कड़ियां सिद्ध न हो। न्यायालय ने कहा कि दहेज़ मृत्यु के अपराध को सिद्ध करने के लिए मृत्यु और दहेज़-जनित क्रूरता या हिंसा के बीच ठोस सम्बन्ध को सिद्ध करना आवश्यक है। यह निर्णय न्यायमूर्ति मनीष माथुर की एकल पीठ ने मेवा लाल व दो अन्य की अपील पर पारित किया। लगभग 27 साल पुराने इस मामले में अपीलार्थियों ने सत्र अदालत द्वारा उन्हें सुनायी गई सात वर्ष की सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी थी। मामला राजधानी के बंथरा थाने का है। वर्ष 1999 में अपीलार्थी सं0 2 की पत्नी ...