छपरा, मार्च 25 -- जब तबला-सरंगी पर थिरकी आस्था और संस्कृति फोटो- 11 मढ़ौरा के शिल्हौरी छठ घाट पर चैता प्रस्तुत करते लोक कलाकार मढ़ौरा। एक संवाददाता महापर्व छठ के पावन अवसर पर युवा जागरण क्लब शिल्हौरी द्वारा आयोजित दुगोला चैता कार्यक्रम ने लोक संस्कृति की जीवंतता को एक बार फिर साकार कर दिया। यह आयोजन केवल एक संगीत प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की संवेदनाओं, आस्था और परंपरा का सजीव उत्सव बनकर उभरा। कार्यक्रम का आरंभ विद्वानों के विचारों से हुआ, जिसमें प्रो भूपेश भीम ने चैता को लोकजीवन की आत्मा बताते हुए कहा कि यह कला शास्त्रीय बंधनों से मुक्त होकर सीधे किसान-मजदूर के जीवन से जुड़ती है। उनके अनुसार, चैता केवल मनोरंजन नहीं बल्कि श्रम की थकान मिटाने और सामूहिक आनंद का माध्यम है, जिसे सरकारी संरक्षण और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। इसके बाद ...