उन्नाव, दिसम्बर 30 -- सर्द हवाओं में थरथराते हाथ, खाली पेट और घर की जिम्मेदारियों का बोझ. यही हकीकत है उन दिहाड़ी मजदूरों की, जो रोज की मेहनत से अपने परिवार का पेट भरते हैं। अब वे सन्नाटे में ठंड से लड़ते हुए सड़कों पर खड़े रहते हैं। ईंट-भट्टों के काम ठप, खेतों में निराई-गुड़ाई नहीं, और छोटे-छोटे घरों में रोटियों की किल्लत - यही उनका जीवन बन गया है। हर चेहरे पर बस एक ही सवाल झलकता है कि अब क्या खाएंगे, क्या बचाएंगे?' उन्नाव, संवाददाता। पिछले एक सप्ताह से जारी शीतलहर और घने कोहरे ने जिले के दिहाड़ी मजदूरों की जिंदगी को बेहाल कर दिया है। सदर कोतवाली गेट पर प्रतिदिन सजने वाली मजदूर मंडी अब सन्नाटे में डूबी है। जो मजदूर पहले रोजाना अपनी कमाई से घर का चूल्हा जला पाते थे, अब भूख और ठंड से त्रस्त हैं। शहर, मोहान, हसनगंज, नवाबगंज और शुक्लागंज के ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.