मधुबनी, जून 29 -- रहिका,निज संवाददाता। विगत पांच वर्ष से किसानों को मौसम की मार खेती पर संकट छाया हुआ है। मौसम साथ नहीं देने से किसानों को खेती करने के तरीके को बेजान बना दिया है। विगत पांच साल से वर्षापात सामान्य औसत से कम हुआ है। जिसके कारण आधी से अधिक भूमि सिंचाई के अभाव में खेती करने योग्य नही रहता है। किसानों ने बताया कृत्रिम संसाधन से पटवन कर खेती करते हैं तो खर्जच भी अधिक होता है परिश्रम एवं व्यय के मुताबिक उपज कम होता है। खेतों की मिट्टी में नमी कम होने से बार बार सिंचाई करना पड़ता है। पहले की अपेक्षा जलवायु परिवर्तन के कारण करीब आठ महीने तापमान गर्म रहता है।

मौसम के प्रभाव मौसम आद्रता एवं तापमान वृद्धि से फसलों में विभिन्न रोग एवं कीटों का नियंत्रण में करने में परेशानी होती है।जिले के 70 प्रतिशत से अधिक लोगों के आजिविका का मूल आध...