प्रयागराज, अप्रैल 7 -- शोध समिति, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के गंगानाथ झा परिसर के संयुक्त तत्वावधान में 'भारतीय ज्ञान परंपरा: शोध पद्धतियां और दृष्टिकोण' विषय पर परिचर्चा आयोजित हुई। मुख्य अतिथि अभय प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय शोध दृष्टि लोककल्याणकारी रही है और मौलिक पद्धतियों को अपनाकर ही बौद्धिक आत्मनिर्भरता संभव है। मुख्य वक्ता प्रो. चंद्रन्शु सिन्हा और हिमांशु पांडेय ने भारतीय दृष्टिकोण से शोध की उपयोगिता बताई। अध्यक्षता प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने की।

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