मुरादाबाद, दिसम्बर 10 -- कुन्दरकी नगर के सीलपुर रोड के निकट दरगाह ख़ानक़ाहे बरकती में मौलाना बरकत अली शाह के चौदहवें उर्स के मौके पर बुधवार रात मुशायरा, नात और मंक़बत का शानदार आयोजन हुआ। महफ़िल की शुरुआत क़ारी कौसर अली अशरफ़ी ने कुरआन पाक की तिलावत और हम्द-ए-बारी तआला से की। इसके बाद देश-भर से आए शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी। उस्ताद शायर ज़मीर साल अदीबी ने अपने कलाम "वल्लाह मेरे ख़्वाब में कुत्बे मदार आ गए." से महफ़िल में रंग जमा दिया। अब्दुल क़ुद्दूस बिलारवी ने कहा "दरबारे हक में शाफए महशर की बात है, किसको क्या मिला यह मुकद्दर की बात है।" इकरार इमरतपुरी ने सुनाया "दर-बदर की भीक से तो हो नहीं सकता भला, माँग जाकर रोज़ाए ख़ैरुल-वरा के सामने।" ग़ुलाम नबी अत्तारी ने कलाम पेश किया "आ गए हैं जो मदीना यह करम है उनका, वरना हम...
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