सिमडेगा, जुलाई 2 -- सिमडेगा, प्रतिनिधि। सिमडेगा जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 143 इन दिनों सफर नहीं बल्कि खौफ का दूसरा नाम बन चुका है। चमचमाती दिखती इस सड़क पर बिखरा हुआ लहू यह चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि यहां सिस्टम की लापरवाही और खराब इंजीनियरिंग का कॉकटेल इंसानी जिंदगियों को लील रहा है। एक पखवाड़ा पूर्व कोलेबिरा के अघरमा के पास हुआ वह रूह कंपा देने वाला हादसा कोई नहीं भूला है। जहां एक पलक झपकते ही चार मासूम बच्चों समेत छह लोगों की हंसती-खेलती जिंदगी सड़क किनारे लगे एक पेड़ से टकराकर जमींदोज हो गई। कुछ साल पहले भी इसी पेड़ ने दो युवकों की जान ली थी। जबकि इसी सड़क पर वर्षों पूर्व एक बाराती वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक ही गांव के दर्जनों लोग मौत के गाल में समा गए थे। इतना ही नहीं कई बार एक दो-लोगों की भी मौत इस ...