मोहिनी एकादशी और रात्रि जागरण, क्या है इसका महत्व, एकादशी व्रत में रात्रि जागरण क्यों जरूरी?
नई दिल्ली, अप्रैल 27 -- शास्त्रीय वर्णन के अनुसार मोहिनी भगवान विष्णु का अवतार रूप थीं। इसकी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। ऐसा कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकले अमृत को लेकर जब देवों और असुरों में विवाद हुआ तो उसके निस्तारण के लिए स्वयं भगवान विष्णु ने ही मोहिनी रूप लिया। जिस तिथि पर भगवान विष्णु प्रकट हुए थे, उस दिन एकादशी थी। तब से यह एकादशी मोहिनी एकादशी के रूप में जानी जाने लगी। वैशाख मास की इस एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। इस एकादशी में व्रत का संकल्प लेकर शाम को पूजा और कथा करने के बाद रात्रि जागरण का खास महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि जो एकादशी के दिन अच्छे श्रद्धा भक्ति से रात्रि जागरण करना चाहिए, इससे श्रीहरि की भक्ति मिलती है।एकादशी व्रत में रात्रि जागरण से क्या लाभ मिलता है? विशेषतः एकादशी की रात में जागकर श्रीहरि की पूजा कर रहे...
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