मधुबनी, जून 25 -- पंडौल,एक संवाददाता। इस महीने में नवास -ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 परिवारिक सदस्य व साथियों ने कर्बला के मैदान में इस्लाम धर्म की रक्षा के लिए शहीद हुए थे। तब से आज तक पूरी दुनिया के मुसलमान इस शहादत की याद में हर साल मुहर्रम के 10 दिनों को इमाम हुसैन की याद में मनाते हैं। यह महीना हमें सब्र और हक पर चलने की शिक्षा देता है। यह भी पढ़ें- मोहर्रम आज : सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों पर होगी कठोर कार्रवाईजुलूस और कार्यक्रम मोहर्रम की नवमी व दशमी तारीख को भारी संख्या में लोग शामिल होकर जुलूस की शक्ल में निकलते है। गुरुवार को नवमी के दौरान सकरी चौक पर चौकी मिलान किया गया तो वही शुक्रवार को मोहर्रम को लेकर अखाड़ा के साथ ताजिया जलूस निकाली जाएगी। प्रखंड के सभी क्षेत्रों में हर वर्ष अधिक चहल-पहल देखी गयी ह...