पूर्णिया, जून 17 -- बैसा, एक संवाददाता। मोहर्रम का चांद नजर आने के साथ ही इस्लामी नववर्ष 1448 हिजरी का आगाज हो गया। मंगलवार शाम चांद दिखाई देने के बाद बुधवार से नए हिजरी वर्ष की शुरुआत हुई। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय में मोहर्रम माह की धार्मिक गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं। इस संबंध में हजरत तौकीर रज़ा ने बताया कि मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीना कर्बला की ऐतिहासिक घटना तथा हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की महान कुर्बानी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने सत्य, इंसाफ और इंसानियत की रक्षा के लिए कर्बला के मैदान में अपने प्राणों का बलिदान दे दिया, लेकिन जुल्म और अन्याय के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। यह भी पढ़ें- मुहर्रम को लेकर अकीदतमंदों ने शहर म...