बस्ती, जून 17 -- बस्ती, हरिशंकर त्रिपाठी। कर्बला की शहादत के गवाह अरबी माह मोहर्रम का चांद नजर आने के साथ ही इमामबाड़ों में मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया। हर ओर से बस या हुसैन और मातम की सदाए गूंजने लगीं। हर आंखें अश्कबार नजर आने लगी। चांद नजर आने के बाद मंगलवार रात को पहली मजलिस शहर के मुख्य इमामबाड़ा शाबान मंजिल में हुई। इमामबाड़े को विशेष रूप से सजाया गया है। सोगवारों ने वहां पहुंचकर अलम व जरी की जियारत किया। मोहम्मद रफीक, जर्रार हुसैन आदि ने सोजख्वानी किया। सुहेल बस्ती व फरजान ने सलाम पेश किया। इं. शबीब हैदर ने बताया कि कर्बला के मैदान में दसवीं मोहर्रम को पैगम्बरे-इस्लाम के नवासे इमाम हुसैन को उनके 72 साथियों के साथ तीन दिन तक भूखा व प्यासा रखने के बाद सीरिया के शासक यजीद इब्ने माविया की फौज ने शहीद कर दिया था। यजीद को उसके पिता माव...