अमरोहा, जून 17 -- अमरोहा, संवाददाता। स्लामिक कैलेंडर के मुताबिक माहे मोहर्रम का चांद नजर आते ही जिले में शिया समुदाय शोक में डूब गया। इमामबाड़ों में काले अलम लगाते हुए फर्श-ए-अजा बिछा दी गई। नौबत बजा आजादरी का ऐलान किया गया। मजलिसों के साथ ही मात्मदारी का दौर शुरू हो गया। वहीं, मातमी जुलूसों को लेकर भी तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। गौरतलब है कि कमोबेश 1400 साल पूर्व ईराक के शहर कर्बला के तपते रेगिस्तान में यजीद की फौज ने रसूले खुदा के नवासे हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम समेत उनके 72 साथियों को भूख और प्यास की शिद्दत के बीच शहीद कर दिया था। यह भी पढ़ें- दिखा चांद मोहर्रम का तो छलक पड़े आंसू बीबी फातिमा को लख्ते जिगर की शहादत का पुरसा देने के लिए मोहर्रम के महीने में कर्बला की शहादत का गम मनाया जाता है। शहीदों की याद में अमरोहा व नौगावां सादा...