हरदोई, जून 24 -- बिलग्राम। हक और बातिल के बीच जो जंग कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने लड़ी। उसी इंसानियत के पैगाम का जिक्र इन दिनों सबकी जुबान पर है। बिलग्राम में हिन्दू.मुस्लिम एकता की मिशाल माना जाने वाला मोर मातम को जुलूस दोपहर बाद आस्ताने नसीरिया से बरामद हुआ। सज्जादा नसीन सैय्यद अफसर अली नसीरी की अगुआई मे जुलूश अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ मुकाम तक पहुचा। इसमे अंजुमन बज्मे अजाए हुसैन,व अंजुमन इस्लामियां रोशनपुर,ने जोर जोर से सीनाजनी की और मर्सियाख्वानों ने मर्सिया पढ़ा। जानकारों के मुताबिक आस्ताने नसीरिया का मोर मातम जुलूश बेहद प्राचीन और ख्याति प्राप्त है। जुलूस में में सैयद काशिफ अली नसीरी सैयद नदीम सैयद दानिश फुरकान नसीरी अदीब नवाब रेहान मतीन मियां अब्दुल वहीद रहे। यह भी पढ़ें- आठवीं मोहर्रम का शहर भ्रमण कर रहा जुलूस

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