मुजफ्फर नगर, मई 4 -- मोरना रविवार को राम कथा के विश्राम के उपरांत कथा व्यास सन्त मोरारी बापू ने अपनी सन्त कुटिया पर भजन सन्ध्या का आनन्द लिया व श्रद्धालुओं से भेंट की।शुकतीर्थ में गंगा तट पर मोरारी बापू की कुटिया पर रविवार की शाम भजन संध्या में कलाकार कपिल व अन्य द्वारा कबीर दास के दोहे को प्रस्तुत किया। जिसमें कबीरदास के प्रसिद्ध रचना बोलो साधु अमृतवाणी, कंबल बरसे भीजे पानी तथा भक्तिकाल के कवि तुलसीदास कि रचना कलिमय जीवन अल्प है, तप साधन न हो सके, केवल नाम अधार को प्रस्तुत किया। इसके अलावा मनमोहन मुहूर्त प्रभु वृंदावन में, अवधपुरी की गलियों में, गंगा जमुना सरस्वती, मिल जाओगे आप कहीं ना कहीं।तेरे नाम की माला फेरेगेतब आप ही खुद ही शर्माओ गेहमे दर्शन दोगे कहीं न कहींयदि चाह हमारे दिल मे हैतुम्हे ढूढ ही लेगे कहीं न कहींवहीं श्रद्धालुओं द्वार...