मेरठ, जून 19 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय विधान पाठ में भक्तों ने वेदी पर विराजमान भगवंतों का अभिषेक कर पाठ की शुरुआत की। शुक्रवार को भगवान की शांतिधारा आर्शी जैन, रूचि जैन, ललित जैन, अतिशय जैन आदि द्वारा की गई। 30 वें दिन श्रुत पंचमी पर जिनवाणी की शोभायात्रा निकाली गई। विधान में आचार्य भाव भूषण जी महाराज ने धर्म सभा प्रवचन करते हुए कहा कि पंचम काल में साक्षात भगवान हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनकी दिव्य वाणी ही 'जिनवाणी माता' के रूप में हमारा मार्गदर्शन कर रही है। शास्त्र ही हमारी आत्मा को सही रास्ता दिखाते हैं। यह भी पढ़ें- श्रुतपंचमी महोत्सव में निकली भव्य शोभायात्रा उन्होंने बताया कि आज से लगभग 2000 साल पहले आचार्य धरसेन की कृपा से मुनि पुष्पदंत और भूतबली महाराज ने पहले जैन ग्रंथ 'षट्खण्डागम' की रचना पूरी क...