लखनऊ, जून 5 -- लखनऊ की पहचान मानी जाने वाली मोती झील और यमुना झील को संवारने की जिम्मेदारी जिस फर्म को दी गई थी, उसी की लापरवाही ने पूरी परियोजना को सवालों के घेरे में ला दिया है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निरीक्षण में झील पर चल रहे कार्यों की हकीकत सामने आई तो उनकी नाराजगी खुलकर दिखी।

चार महीने बाद भी नहीं बदली तस्वीर एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इससे पहले 24 फरवरी 2026 को भी मोती झील और यमुना झील परियोजना का निरीक्षण किया था। उस समय ठेकेदार फर्म मेसर्स सिंह ट्रेडर्स को काम में तेजी लाने और गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए थे। लेकिन चार महीने बाद भी स्थिति बदतर मिली। मोती झील में डिसिल्टिंग, बाउंड्रीवाल, फेंसिंग और सफाई जैसे बुनियादी काम तक पूरे नहीं पाए गए। ठेकेदार के पास पर्याप्त मशीनें और श्रमिक नहीं मिले।

वीसी ने की कड़ी ...