रांची, अप्रैल 6 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने मोटर वाहन फिटनेस प्रमाणपत्र से संबंधित याचिका को जनहित का नहीं माना और सोमवार को उसे निष्पादित कर दिया। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि मोटर वाहन के मालिक किसी शोषित या वंचित वर्ग की श्रेणी में नहीं आते हैं। ऐसे में इस मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस संबंध में आशीष कुमार शर्मा ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) द्वारा वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं, जिससे वाहन मालिकों को परेशानी हो रही है। इस पर अदालत ने कहा कि वाहन मालिक सक्षम हैं और वे अपनी शिकायत संबंधित जिला परिवहन पदाधिकारी और उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

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