रांची, अप्रैल 6 -- रांची, प्रमुख संवाददाता। जैन मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि मोक्ष दूर की मंजिल नहीं, बल्कि भीतर की विकार रहित अवस्था है। जब राग-द्वेष की ज्वाला शांत होती है, तभी आत्मा में सिद्धत्व का प्रकाश प्रस्फुटित होता है। जिन्होंने अपने करने योग्य सब काम को कर लिया वो सिद्ध हैं, अब वे कृतार्थ हो चुके हैं। जैन मुनि सोमवार को पुराने जेल परिसर में बिरसा फन पार्क में चल रहे पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन पर समाज के लोगों के बीच प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने आत्मा की परम सिद्धि पर प्रवचन करते हुए कहा कि जब कोई बड़ा लक्ष्य लेकर निकलते हैं और इसकी पूर्णता होती है तो एक अलग प्रकार के आनंद की अनुभूति होती है। इसमें एक अवस्था ऐसी भी होती है, जिसे अल्पकालीन माना जाता है। इसी कारण हमारे लक्ष्य रोज बदल जाते हैं। एक लक्ष्य को पूर्ण ...