सहरसा, मई 4 -- सहरसा, हमारे प्रतिनिधि। सूबे का पहला मॉडल हॉस्पिटल और कायाकल्प में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला सदर अस्पताल इन दिनों अपनी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। जहां एक ओर अस्पताल को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया है, वहीं दूसरी ओर यहां आने वाले मरीज और उनके परिजन पीने के पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए तरसते नजर आ रहे हैं। यह स्थिति अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है और मॉडल अस्पताल की वास्तविकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं। यहां मरीजों को इलाज के लिए जरूरी स्लाइन तो आसानी से मिल जाता है, लेकिन जब बात प्यास बुझाने की आती है तो हालात बेहद खराब दिखते हैं। इमरजेंसी के पास लगा वाटर कूलर नाम मात्र का है, जिसमें इतना कम पानी आता है...