अयोध्या, अप्रैल 16 -- भगवान सूर्य देव मेष राशि में पहुंच गये है। मेष संक्रांति के इस पर्व से सूर्य अपनी उच्च राशि में है तो उनकी प्रचंडता भी बढ़ गयी है। ऐसे में पांच वर्ष के बालक रामलला को गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए उनके आहार-विहार में बदलाव कर दिया गया है। रामलला को उनके दैनिक आहार में सुपाच्य भोज्य पदार्थों के अलावा चने की सत्तू व छाछ का भरपूर उपयोग शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा मौसमी फलों खीरा-ककड़ी, तरबूज व खरबूजा के साथ संतरे इत्यादि का रस भी परोसा जा रहा है।सतुआ संक्रांति मंदिर निर्माण के प्रभारी गोपाल राव कहते हैं कि मेष संक्रांति को सतुआ संक्रांति भी कहा जाता है। गर्मी के इस मौसम में सतुआ बहुत उपयोगी है और इसकी तासीर ठंडी होती है। इससे पाचन क्रिया भी ठीक रहती है। इसके कारण ही पूरे माह सतुआ के छाछ का प्रयोग रामलला जी करेंगे।...
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