मेरठ, जून 12 -- भविष्य में स्वच्छ और नए ईंधन के रूप में देखे जा रही हाइड्रोजन सूरज की रोशनी में आसानी से बन सकेगी। पारंपरिक ठोस उत्प्रेरकों की तुलना में खोखली संरचना वाले फोटोकेटेलिस्ट (प्रकाश उत्प्रेरक) 48 गुना अधिक तक हाइड्रोजन बना सकेंगे। यह प्रक्रिया सूरज की रोशनी में पानी को सीधे हाइड्रोजन फ्यूल (ईंधन) में बदल सकेगी। खोखले फोटोकेटेलिस्ट भविष्य में हाइड्रोजन निर्माण के उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य में नई राह खोल सकते हैं। खोखली संरचना केंद्रित फोटोकेटेलिस्ट की यह तकनीक सीसीएसयू कैंपस में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर डॉ.संजीव कुमार शर्मा और रिसर्च स्कॉलर अंशिका गुप्ता ने विकसित की है। इस अध्ययन में डॉंगुक विवि कोरिया के वैज्ञानिक सेंगमिन यंग, इन्हवा ली, यॉंगमिन ली और सेजून ली भी शामिल रहे। उक्त तकनीक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल एल...