बागपत, जून 25 -- खेकडा के जैन समाज और समाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने जैन संतों की पिछी में लगने वाले मोर पंखों के बारे में मेनका गांधी द्वारा दिए गए बयान पर रोष जताया हैं। उनका कहना है कि जैन संतों की पिछी में उन्हीं पंखों को लगाया जाता है। जिन्हें मौर स्वयं त्यागता है। पिच्छी अहिंसा का प्रतीक होती है। पिचछी जैन साधुओं का अनिवार्य उपकरण है। इसका उपयोग वे सूक्ष्म जीवों की रक्षा के लिए करते हैं ताकि चलते-फिरते, बैठते-उठते किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचे। यह पूर्णत: अहिंसक परंपरा है। जो हजारों वर्षों से चली आ रही है। मेनका गांधी का बयान समाज की भावनाओं को आहत करता है। मेनका गांधी को अपने भ्रामक बयान के लिए समाज से माफी मांगनी चाहिए।

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